*अटल वाणी - 588*
*हे ईश्वर !*
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अकल,मंद होती तो
बंदगी करते जरूर
जिंदगी को सुख से
भर लेते हजूर !
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डॉ श्याम अटल
मैं एक सामयिक काव्य रचनाकार हूँ !मेरा खुद का नर्सिंग होम है ! मेरा पेशा चिकित्सक का है !मानव सेवा के साथ साहित्य सेवा कर रहा हूँ! देवी माँ की असीम कृपा से आप के मध्य नित नई काव्य रचना के साथ आता रहूँगा ! "मेरा 'लेखक' मुझसे बडा - मैं 'आत्मा' वह 'परमात्मा', 'चिकित्सक' बना'प्रयास' से - 'कवि' 'प्रभु-प्रसाद' से , 'नव रस' का जानकार - चाहूँगा आपका प्यार ! "आपका अपना - डॉ.श्याम अटल
Friday, May 29, 2020
Thursday, March 12, 2020
Wednesday, March 11, 2020
Monday, March 2, 2020
Sunday, February 23, 2020
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