Thursday, March 12, 2020

*अटल वाणी - 586* *सर्वत्र तू ही तू* *नजर आता है* *अटूट तुझसे ये* *अपना नाता है !* ************************* सारे रिश्ते-नाते हैं भगवान से हम सभी हैं रूप भगवान के अतः सभी से हमें प्यार है रूप-अरूप में दर्शन तोहार है ! ************************* डॉ श्याम अटल

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