Monday, November 5, 2018

अटल मंथन
चिंतनीय
प्रकृति पूरे वर्ष,कहर बरपाती है
धरती के प्राणी,सह नहीं पाते हैं !
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दिल्ली की वायु,प्रदूषण भरी
सांस लेने में,कठिनाई बढ़ी !
हिमाचल,उत्तराखंड,और कश्मीर
बर्फ की चादर में,बिजली विहीन !
फसल फलों की,चौपट हुई
जिंदगी जीना,दूभर कर गई !
आतंक की ठांय ठांय,है चहुं ओर
नारकीय पीड़ा,पृथ्वी पर घनघोर !
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डॉ श्याम अटल  

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