अटल मंथन
कीचड़ में कमल,खूब खिलता है
सरकार को सहारा,यूं मिलता है !
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कहो तो मरो,न कहो तो भी
राजनीति की,बड़ी कठिन डगर जी !
चुनावी शतरंज की,बाजी बिछ चुकी
खेल चलेगा और,कईं माह तक जी !
शह और मात पर,चौकस है निगाह
वोटर का दिल,देगा किसे पनाह ?
चोर-साहूकार कौन,कहना कठिन
लेन-देन के आरोप पर,खड़ा प्रश्न चिन्ह ?
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डॉ श्याम अटल
कीचड़ में कमल,खूब खिलता है
सरकार को सहारा,यूं मिलता है !
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कहो तो मरो,न कहो तो भी
राजनीति की,बड़ी कठिन डगर जी !
चुनावी शतरंज की,बाजी बिछ चुकी
खेल चलेगा और,कईं माह तक जी !
शह और मात पर,चौकस है निगाह
वोटर का दिल,देगा किसे पनाह ?
चोर-साहूकार कौन,कहना कठिन
लेन-देन के आरोप पर,खड़ा प्रश्न चिन्ह ?
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डॉ श्याम अटल
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