अटल मंथन
तरुण ज्ञान के सागर का,अब भक्त ह्रदय में वास है
ऐसा लगता है मुनिवर, कहीं यहीं हमारे पास हैं ।
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कड़वे प्रवचनों के लिये जाने गये, सारी दुनिया में माने गये
तरुण सागर समाधि सागर में,आखिरकार लीन हुए।
प्रवचन का विशेष लहजा, ध्यानाकर्षित करता था
जैन धर्म की पताका, जग में फहराता रहता था।
संसार को सुखी बनाने का,आजीवन अथक प्रयास किया
इंटरनेट के इस युग में, वाणी को अमर बना ही लिया।
शरीर भले ही ना रहा, अदृश्य मार्गदर्शक रहेंगे वे
भक्तों का दायित्व है ये,उनकी बताई राह पर चले ।
श्रद्धा सुमन समर्पित हैं, हर देशवासी गमगीन है
मुनि श्री से रुबरू होने की,स्मृति ही अब शेष है।
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डॉ श्याम अटल
तरुण ज्ञान के सागर का,अब भक्त ह्रदय में वास है
ऐसा लगता है मुनिवर, कहीं यहीं हमारे पास हैं ।
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कड़वे प्रवचनों के लिये जाने गये, सारी दुनिया में माने गये
तरुण सागर समाधि सागर में,आखिरकार लीन हुए।
प्रवचन का विशेष लहजा, ध्यानाकर्षित करता था
जैन धर्म की पताका, जग में फहराता रहता था।
संसार को सुखी बनाने का,आजीवन अथक प्रयास किया
इंटरनेट के इस युग में, वाणी को अमर बना ही लिया।
शरीर भले ही ना रहा, अदृश्य मार्गदर्शक रहेंगे वे
भक्तों का दायित्व है ये,उनकी बताई राह पर चले ।
श्रद्धा सुमन समर्पित हैं, हर देशवासी गमगीन है
मुनि श्री से रुबरू होने की,स्मृति ही अब शेष है।
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डॉ श्याम अटल
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