Thursday, November 2, 2017

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Shyam Atal ujjainshyam@gmail.com

11:15 PM (19 minutes ago)
to ujjainagnipath, bcc: Imran
अटल मंथन
निर्माण कठिन,विध्वंस सरल 
पी रहा,मानव गरल !
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जहां देखिये वहीं,आतंकवाद का हमला है
मानवता मर रही,सारा संसार दहला है !
अमेरिका हो या अफगानिस्तान,रोज दहशतगर्दी है
मानवता के दुश्मनों की,लड़ने की मर्जी है !
सनकी तानाशाह किम,बर्बादी पर तुला है 
उसे उकसाने ड्रेगन,पर्दे के पीछे छिपा है !
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डॉ श्याम अटल

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