Tuesday, August 4, 2015

अटल मंथन
राजनीति की दुर्दशा,अब देखी न जाए
हे भगवान बताएं,कौन इन्हें समझाए ?
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संसद में गतिरोध,मिटाये नहीं मिटता
लोकतंत्र व्यवहारिक,मूल्यों को नहीं सीखता !
कोई भी दल आरोपों से,मुक्त नहीं है
अंदरुनी सत्य यह , जानते सभी हैं !
फिर भी स्वयं को पाक साफ,दूसरों को दागी कहते
और वोटर असहाय,रोज झगड़े देखते !
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डॉ श्याम अटल

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