Monday, February 18, 2019

अटल मंथन
समय गुजरने के साथ,मुँह खुलने लगे हैं
सरकार पर आरोप,लगने लगे हैं !
======================================
अंदर-बाहर आग लगाने,वाले हो गए कईं 
इसलिये विकास की गाड़ी,पटरी पर नहीं !
जिसे देखो वही अपनी ढपली,अपना राग बजाए
देश पर विपदा आये,बस तब ही बाज आए !
चुनाव करीब होने से,सब बने थोड़े शरीफ
सत्ता और विपक्ष में कुश्ती,हुई अजीबोगरीब !
======================================
डॉ श्याम अटल 

No comments:

Post a Comment