Friday, July 27, 2018

अटल मंथन
समूची दुनिया पानी में,डूबती नजर आ रही
बाढ़ के प्रकोप से,नहीं बच पा रही !
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नई से भी नई दिल्ली,बसाने की जरुरत है
बारिश के कहर से,बचाने की हसरत है !
नए से भी नए शहर,बसाने की जरुरत है
निकासी समुचित जहां,कुछ ऐसी हसरत है !
रहने लायक जमीं धरा पर,घटती जा रही
बहुसंख्यक आबादी घरों में,रह नहीं पा रही !
जलभराव की समस्या,हर वर्ष उफान पे
मौसम के मिजाज से,सदैव सावधान रहें !
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डॉ श्याम अटल 

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