Tuesday, April 10, 2018

अटल मंथन
गांधी,गांधी में फर्क है
सबके अपने तर्क हैं
खाकर बेडा गर्क है !
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उपवास के दिन गए,प्रभावी न रहे
भूख जो लगे तो,किस तरह सहें ?
अपने ही जाल में फंसे,जग देखकर हंसे
घर से खाकर न चले,तो नेता संकट में पड़े !
दलितों का हित एक ड्रामा,सफेदपोश तमाशा
जान गया जमाना,मुश्किल दिल जीत पाना !
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डॉ श्याम अटल 

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