अटल मंथन
वसुधैव कुटुंबकम,बहुत दूर की बात है
स्वार्थ राजनीति की,आदत जन्मजात है !
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देश को संभालना,किसी के बस की बात नहीं
प्रांतवाद की राजनीति में, रोज दुखद बातें नई !
गुजराती मुंबई महाराष्ट्र में,नहीं चलाई जाए
पोस्टर फाड़े-बोर्ड तोड़े,देश में आग लगाए !
कट्टरवादी सोच,देश के लिये नुक्सानदायी
तब जब सीमा पर गोले,बरसा रहे आततायी !
निष्कर्ष,
अतिथि देवो भव,सोच अब न रहा
काट रहा हर कोई,दूसरे का गला !
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डॉ श्याम अटल
वसुधैव कुटुंबकम,बहुत दूर की बात है
स्वार्थ राजनीति की,आदत जन्मजात है !
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देश को संभालना,किसी के बस की बात नहीं
प्रांतवाद की राजनीति में, रोज दुखद बातें नई !
गुजराती मुंबई महाराष्ट्र में,नहीं चलाई जाए
पोस्टर फाड़े-बोर्ड तोड़े,देश में आग लगाए !
कट्टरवादी सोच,देश के लिये नुक्सानदायी
तब जब सीमा पर गोले,बरसा रहे आततायी !
निष्कर्ष,
अतिथि देवो भव,सोच अब न रहा
काट रहा हर कोई,दूसरे का गला !
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डॉ श्याम अटल
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