अटल मंथन
लातों के भूत,बातों से न मानेंगे
दर्द दिये बगैर,दर्द वे न जानेंगे !
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पाक छापामार,लड़ाई लड़ रहा है
भारतीय सेना को,क्रुद्ध कर रहा है !
आक्रमण उसका,सुरक्षा हमारी
इस तकनीक से हमें,क्षति है भारी !
उसी की तर्ज पर,युद्ध छेड़िये
दुश्मन की सारी,अकड़ हेड़िये !
आक्रामक बने बगैर,आतंक न रुकेगा
अकल तभी आयेगी,जब पड़ौसी ठुकेगा !
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डॉ श्याम अटल
लातों के भूत,बातों से न मानेंगे
दर्द दिये बगैर,दर्द वे न जानेंगे !
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पाक छापामार,लड़ाई लड़ रहा है
भारतीय सेना को,क्रुद्ध कर रहा है !
आक्रमण उसका,सुरक्षा हमारी
इस तकनीक से हमें,क्षति है भारी !
उसी की तर्ज पर,युद्ध छेड़िये
दुश्मन की सारी,अकड़ हेड़िये !
आक्रामक बने बगैर,आतंक न रुकेगा
अकल तभी आयेगी,जब पड़ौसी ठुकेगा !
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डॉ श्याम अटल
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