Tuesday, July 28, 2015

अटल मंथन
सड़कें सितम,ढाने लगी हैं
उठापटक,मचाने लगी हैं !
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बारिश क्या आई,सड़कें धुल गईं
निर्माण विभाग की,पोल खुल गई !
गड्डे गहरे-गहरे हो गए,दुर्घटना के चेहरे हो गए
वाहन चालक फंस जाते हैं,जलकूपों में धंस जाते हैं !
मिलावट का प्रमाण यही है,उखड़ी सड़कें हर कहीं हैं !
गुणवत्ता सब गौण हो गई,वसूली हेतु 'टोल' हैं कईं !
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डॉ श्याम अटल

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