अटल मंथन
मस्जिद हो या गिरजाघर,सभी निशाने पर
हो रहा है विध्वंस,किसके ईशारे पर ?
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एक तरफ संसार को,सुंदर बनाया जा रहा
दूसरी ओर इंसान को,बम से उड़ाया जा रहा !
निर्माण करने में,कईं बरस लग जाते हैं
विनाश करके वे,तत्काल कहर ढाते हैं !
पागलों की कमी नहीं है,इस संसार में
और कुछेक ही काफी हैं,हमारे विचार में !
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डॉ श्याम अटल
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