अटल वाणी - 412
सेवा का सुख सर्वोपरि-मिलते उसमें साक्षात हरि !
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1-अपनी और अपनों की सेवा,आत्म सेवा है
2-परायों की सेवा,परमात्म सेवा है !
पहला-लौकिक ( सांसारिक ) कृत्य है
दूसरा-पारलौकिक परमार्थ है !
पहला सुख सृजित करता है
दूसरा परमानंद देता है !
संदेश-सभी अपने हैं,दोहरे आनंद लें !
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डॉ श्याम अटल
सेवा का सुख सर्वोपरि-मिलते उसमें साक्षात हरि !
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1-अपनी और अपनों की सेवा,आत्म सेवा है
2-परायों की सेवा,परमात्म सेवा है !
पहला-लौकिक ( सांसारिक ) कृत्य है
दूसरा-पारलौकिक परमार्थ है !
पहला सुख सृजित करता है
दूसरा परमानंद देता है !
संदेश-सभी अपने हैं,दोहरे आनंद लें !
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डॉ श्याम अटल
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